Thursday, February 12, 2026

 भ्रम में ही रहने दो, कुछ तो अच्छा लगता है।

हक़ीक़त में कौन यहॉं किस को अच्छा लगता हैं,

जो कभी मुझसे बात करने के लिए मेरा इंतजार किया करते थे,

अब उन्हें ही मेरी बातों में कहा अच्छा लगता हैं। 

Monday, February 2, 2026

क्या हॅू मैं.....?

 ना हॅू रोशनी, किसी की ऑखों की, ना हूॅं चौन, किसी के दिल का मैं,

जो काम किसी के, आ ना सके, मुट्ठी भर बस, वही धूल हॅू मैं।।

ना दवा किसी के दर्द की मैं, ना सुकून किसी की आखों का,

ना हवा सा तेरे पास कहीं मैं, ना ही तेरी, मीठी नींद हूॅ मैं।।

क्यो दुआ करे, मेरे लिए कोई, क्यो आए, चढ़ाने फूल कोई,

क्यो दीप जलाए, मेरे लिए कोई, जब मान चुके सब, बेकार हूॅ मैं।।

ना रागए, ना अनुराग हॅू मैं,ना भाग्य, ना चरित्र हूॅ मैं,

जो टूट चुका, आकार वही मैं, जो उतर चुका, श्रृंगार वही मैं।।

मैं राग ना कोई जीवन का, क्यो सुनने, कोई बैठेगा,

मै आवाज़ हूॅ, एक दर्द भरी, कोई कैसे सुन कर हॅंस देगा।। 

बस एक जगह ही ठहरा हॅू मैं, ना पास किसी सेे, ना ही दूर हॅू मैं,

जो बदल गया, वही भाग्य हॅू मैं, जहॉ पहुॅच ना सके, वही मंजिल हॅू मैं।।  


ऐसा ना होगा **

मुझे जलाने आओ तो फिरबस इतना तुम याद रखना,

बैठो मेरे पास अगर तोमुझको ही तुम याद करना।

भीड़ तो होगीखूब मगरचर्चाओं में न खोना तुम,
पीठ न दिखाना मुझको तुमबस मुझे ही देखा करना तुम।

आँखें मेरी बंद होंगीफिर भी नज़रें मिलाऊँगा,
महसूस करोगे मुझको तोबहुत कुछ कह जाऊँगा।

कुछ नाम मेरा पुकारेंगेपर आवाज़ वहीं की वहीं गूँजेगी,
मेरे न होने की सच्चाई अब सबके भीतर बैठेगी।

जैसा भी थाअच्छाबुराअब कोई हिसाब न लगाएगा,
मेरे जाते ही हर ज़ुबान पर अच्छा इंसान था” रह जाएगा।

जो बातों में काँटा था कभीअब यादों में फूल बन जाऊँगा,
मेरे रहते जो समझ न पाएअब सबको समझ आ जाऊँगा।

आग की लपटों में घिरा हुआअब कोई शोर न मचाऊँगा,
है से था के इस सफ़र में पता नहीं कहाँ रह जाऊँगा।

अब न कोई सवाल बचेगान ही शब्दों से कोई बवाल उठेगा।
जो मुझे समझ सके न कभीउनको अब बस मेरी कमी का एहसास रहेगा।

  भ्रम में ही रहने दो, कुछ तो अच्छा लगता है। हक़ीक़त में कौन यहॉं किस को अच्छा लगता हैं, जो कभी मुझसे बात करने के लिए मेरा इंतजार किया करते थे...